Hariyali Teej (हरियाली तीज)

03 August, 2019(Saturday)

Tritiya Tithi Begins – 01:36 AM on 03 Aug., 2019

Tritiya Tithi Ends – 10:05 PM on  03 Aug., 2019

हरियाली तीज पूजा का शुभ मुहूर्त व् क्या करना चाइये

  • हरियाली तीज के पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर में 03:37 से रात 10:21 बजे तक आप पूजा अर्चना कर सकते हैं।भगवान शिव का परिवार सहित पूजन किया जाता है।
  • तीज के अफसर पर शादीशुदा महिलाओं के मायके से सिंधारा आता हैं, इसमें श्रृंगार और मिठाई का सामान होता है ।
  • तीज पर सासु माँ अपनी बहुओ को नए कपडे और श्रृंगार का सामान दिलाती हैं । इसमें सुहाग का सामान प्रमुख होता हैं।
  • तीज पूजा के दौरान बहु अपनी सास के लिए नए कपडे व् उपहार पूजती हैं। और खाने की थाली के साथ उन्हें ये बायना सौपती हैं । इस थाली को सास कभी खली नहीं लौटती, उसमे पैसे, फल या उपहार रखकर बहु को दिया जाता हैं ।

पूजा का सामान

  • बेल पत्र
  • जनेऊ
  • धूप-अगरबत्ती
  • कपूर
  • श्रीफल
  • कलश
  • अबीर
  • चंदन
  • तेल
  • घी
  • दही
  • शहद
  • दूध
  • पंचामृत .

पार्वती जी के श्रृंगार का सामान

  • चूड़‍ियां
  • आल्‍ता
  • सिंदूर
  • बिंदी
  • मेहंदी
  • कंघी
  • शीशा
  • काजल
  • कुमकुम
  • सुहाग पूड़ा
  • श्रृंगार की अन्‍य चीज़े

हरियाली तीज पूजा विधि

इस दिन महिलाये भगवन शिव की पूजा भांग, धतूरा, अक्षत्, बेल पत्र, श्वेत फूल, गंध, धूप आदि अर्पित करती हैं। वहीं माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाती हैं। सुहागिन महिलाएं मायके से आए हुए वस्त्र को पहनती हैं।

हरियाली तीज व्रत कथा

हरियाली तीज व्रत कथा इस प्रकार हैं । भगवान शिव एक दिन माता पार्वती को अपने मिलने की कथा सुनाते हैं। भगवान शिव माता पार्वती को बताते हैं कि तुमने मुझे अपने पति के रूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया, लेकिन तुम मुझे अपने पति के रूप में एक भी बार नही पा सकी। फिर जब 108वीं बार तुमने पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया तो तुमने मुझे अपने वर के रूप में पाने के लिए हिमालय पर घोर तपस्या की। और उस तपस्या के दौरान तुमने अन्न -जल का भी त्याग कर दिया था। और सूखे पत्तों चबाकर तुम पूरा दिन बिताती थी। बिना मौसम की परवाह किए हुए तुमने निरंतर तप किया। तुम्हारे पिता तुम्हारी ऐसी स्थिति देखकर बहुत दुखी व नाराज थे। लेकिन फिर भी तुम वन में एक गुफा के अंदर मेरी आराधना में लीन रहती थी। भाद्रपद के महीने में तृतीय शुक्ल को तुमने रेत से एक शिवलिंग बनाकर मेरी आराधना की जिससे खुश होकर मैने तुम्हारी मनोकामना पूरी की। जिसके बाद तुमने अपने पिता से कहा कि ‘पिताजी, मैंने अपने जीवन का काफी लंबा समय भगवान शिव की तपस्या में बिता दिया है। और अब भगवान शिव ने मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर मुझे स्वीकार भी लिया है। इसलिए अब मैं आपके साथ तभी चलूंगी जब आप मेरा विवाह भगवान शिव के साथ ही करेंगे। जिसके बाद पर्वतराज ने तुम्हारी इच्छा स्वीकार कर लिया और तुम्हें घर वापस ले गए। कुछ समय बाद ही उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ हमारा विवाह करा दिया। शिव जी कहते हैं कि हे पार्वती! भाद्रपद शुक्ल तृतीया को तुमने मेरी आराधना करके जो व्रत किया था यह उसी का परिणाम है जो हम दोनों का विवाह संभव हो सका। शिव जी ने पार्वती जी से कहा कि इस व्रत का महत्त्व यह है कि इस व्रत को पूरी निष्ठा से करने वाली प्रत्येक स्त्री को मैं मनवांछित फल देता हूँ। इतना ही नही भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि जो भी स्त्री इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करेंगी उसे तुम्हारी तरह अचल सुहाग की प्राप्ति होगी।

 

पार्वती जी की आरती

जय पार्वती माता जय पार्वती माता

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता

जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा

देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता

हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता

सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता

नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

देवन अरज करत हम चित को लाता

गावत दे दे ताली मन में रंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता

सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।

जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

Shiv Ji Ki Aarti (शिवजी की आरती )

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा….

तन मन धन सब कुछ हैं तेरा स्वामी सब कुछ है तेरा |
तेरा तुझको अर्पण क्या लगे मेरा ||
ॐ जय शिव ओंकारा….

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