Krishna Janmashtami Dates, Pooja Vidhi & Aarti

krishna janamshmi

5248th Birth Anniversary of Lord Krishna

30 August, 2021(Monday)

Nishita Puja Time –  11:59 PM to 12:44 AM, Aug 31, 2021

  • Ashtami Tithi Begins –  11:25 PM on Aug 29, 2021
  • Ashtami Tithi Ends –  01:59 AM on Aug 31, 2021
  • Rohini Nakshatra Begins – 06:39 AM on Aug 30, 2021
  • Rohini Nakshatra Ends –  09:44 AM on Aug 31, 2021

कृष्णा जन्माष्टमी पूजा विधि

पूजा के लिए सामान सूची

  • कृष्णा जी के नए कपडे
  • बांसुरी
  • ज़ेवरात
  • पूजा थाली
  • घंटा
  • दीया
  • कपूर
  • चावल
  • इलाइची
  • सुपारी
  • पैन पत्ता
  • मौली
  • गंगा जल
  • सिन्दूर
  • अगरबत्ती
  • फूल
  • घी
  • पंचामृत
  • मिठाई

पूजा की विधि

  1. सुबह जल्दी उठें और घर के मंदिर में पूजा की व्यवस्था करें। सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। गणेश जी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें।
  2. फूल चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। चावल चढ़ाएं।
  3. गणेश जी के बाद श्रीकृष्ण की पूजा करें। श्रीकृष्ण को स्नान कराएं।
  4. स्नान पहले शुद्ध जल से फिर पंचामृत से और फिर शुद्ध जल से कराएं। इसके बाद वस्त्र अर्पित करें।
  5. वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। हार-फूल, फल मिठाई, जनेऊ, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, पान, दक्षिणा और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। तिलक करें। धूप-दीप जलाएं।
  6. तुलसी के पत्ते डालकर माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
  7. कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें। आप ऊँ नमो भगवते गोविन्दाय, ऊँ नमो भगवते नन्दपुत्राय या ऊँ कृष्णाय गोविन्दाय नमो नम: मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
  8. कपूर जलाएं। आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें। 
  9. पूजा में हुई अनजानी भूल के लिए क्षमा याचना करें।
  10. इसके बाद अन्य भक्तों को प्रसाद बांट दें और खुद भी प्रसाद ग्रहण करें।

आरती कुंज बिहारी की

आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,
गले में वैजंती माला बजावे मुरली मधुर वाला,
श्रवण में कुंडल जल काला, नंद के आनंद नंदलाला,
गगन शाम अंग कांति काली राधिका जमा रही आली,

लटन में थारे बनमाली, भ्रमण सी अलक कस्तूरी तिलक,
चंद्रा सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,
आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,

कनक माय मोर मुकुट बिलसे, देवता दर्शन को तरसे,
गगन सो सुमन राशि बरसे,
बाजे मोरचंग मधुर मृदंग ग्वालिन संग अतुल रात्रि गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,
आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर गिरिधर कृष्ण मुरारी की,

जहां ते प्रगट भई गंगा कलुष कली हरिनी श्री गंगा,
स्मरण ते होत मोह बहनगा,
बसी शिव शिष जटा के बीच हरइ अघ कीच चरण,
छवि श्री बनवारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,
चमकती उज्जवल तत रेनू बज रही वृंदावन बेनु,
चाहू दीसी गोपी ग्वाल धेनू हसत मृदु मंद चंदानी,
चंद्र कटक भाव फंड तेरे सुन दीन भिखारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,

आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की |
आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की |